Up board 10th science प्रकाश के प्रकीर्णन को उदाहरण सहित समझाइए

प्रकाश के प्रकीर्णन को उदाहरण सहित समझाइए ।

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प्रकाश का प्रकीर्णन– जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से गुजरता है, जिसमें अति सूक्ष्म आकार के कण विद्यमान हों, तो इन कणों के द्वारा प्रकाश का कुछ भाग सभी दिशाओं में फैल जाता है। इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। लाल रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे कम तथा बैंगनी रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है। उदाहरण

(i) खतरे का सिग्नल लाल होना- इसका कारण यह कि लाल रंग का प्रकीर्णन बहुत कम होता है। इसी कारण लाल सिग्नल बहुत दूर से दिखाई दे जाता है। यही कारण है कि रेलगाड़ी को रोकने की झंड़ी, क्रिकेट की गेंद तथा अस्पताल की गाड़ी पर क्रॉस का चिह्न लाल रंग के होते हैं।

(ii) सूर्योदय एवं सूर्यस्त के समय सूर्य का लाल दिखाई देना- प्रातः काल या सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग गहरा पीला, नारंगी तथा लाल दिखाई देना भी प्रकाश के प्रकीर्णन का प्रभाव है। सूर्योदय या सूर्यास्त के समय जब सूर्य पृथ्वी के क्षितिज पर होता है, सूर्य से आने वाले प्रकाश को वायुमंडल में अधिक मार्ग तक करना पड़ता है, जिसके कारण सूर्य का प्रकाश बैंगनी, नीले, हरे रंगों का लगभग संपूर्ण अंश, प्रकीर्णित होकर आकाश में बिखर जाता है तथा अवशेष पीले, नारंगी तथा लाल का अंश ही पृथ्वी पर हमारे नेत्रों तक सीधा पहुँच पाता है। इसी कारण सूर्यादय या सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग पीला, नारंगी व लाल दिखाई देता है।

(iii) आकाश का रंग नीला दिखाई देना- सूर्य के प्रकाश की किरणें जब वायुमंडल से होकर गुजरती हैं, तो मार्ग में आने वाले वायु के अणुओं, धूल कणों व अन्य पदार्थों के के सूक्ष्म कणों द्वारा इसका प्रकीर्णन होता है। बैंगनी एवं नीले रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन लाल रंग के प्रकाश की अपेक्षा 16 गुना अधिक होता है। अतः बैंगनी एवं नीला प्रकाश चारों ओर फैल जाता है। यह फैला हुआ प्रकाश हमारी आँखों में पहुँचता है, जिसके कारण हमें आकाश नीला दिखाई देता है। यदि वायुमंडल न हो, तो सूर्य के प्रकाश के मार्ग में प्रकीर्णन नहीं होता है, जिसके कारण हमें आकाश काला दिखाई देता है। यही कारण है कि चंद्रमा के तल से देखने पर आकाश काला दिखाई देता है।

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