UP BOARD CLASS 9TH HINDI CHAPTER 1 DEEPDAN एकांकी खण्ड

UP BOARD CLASS 9TH HINDI CHAPTER 1 DEEPDAN एकांकी खण्ड

UP BOARD SOLUTION FOR CLASS 9 HINDI
UP BOARD CLASS 9TH HINDI CHAPTER 1 DEEPDAN एकांकी खण्ड
कक्षा 9 हिंदी पाठ 1- दीपदान (डॉ-रामकुमार वर्मा)


(क) लघु उत्तरीय प्रश्न कक्षा 9 हिंदी दीपदान


1- ‘दीपदान’ एकांकी की मुख्य पात्र कौन है?
उत्तर— ‘दीपदान’ एकांकी की मुख्य पात्र ‘पन्ना’ है, जो चित्तौड़ के स्वर्गीय महाराणा साँगा के छोटे पुत्र कुँवर उदयसिंह की धाय है ।। प्रस्तुत एकांकी की कथा पन्ना के चारों तरफ ही घूमती है, जिसमें पन्ना के साहस, प्रेम, बलिदान, स्वामिभक्ति आदि का प्रस्तुतीकरण किया गया है ।।

2- ‘दीपदान’ उत्सव का आयोजन किसके द्वारा कराया गया और क्यों?
उत्तर— ‘दीपदान’ उत्सव का आयोजन चित्तौड़ के तत्कालीन संचालक बनवीर ने कराया था ।। उसने यह आयोजन चित्तौड़ के सिंहासन के उत्तराधिकारी उदयसिंह की हत्या करने के लिए किया था ।। बनवीर की योजना थी कि जब सभी उत्सव देखने में लीन रहेंगे तो वह रात्रि के अंधकार में चुपचाप जाकर उदयसिंह की हत्या कर देगा और उसके राजा बनने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा ।।

3- पन्ना ने उदयसिंह को उत्सव में क्यों नहीं भेजा?
उत्तर— पन्ना को बिना किसी कारण आयोजित किए जाने वाले दीपदान उत्सव के विषय में जानकर किसी षड्यंत्र का आभास होता है, इसलिए वह उदयसिंह को उत्सव में नहीं भेजती ।।

4- किस कारण बनवीर, उदयसिंह की हत्या कराना चाहता था?
उत्तर— उदयसिंह चित्तौड़ के महाराणा साँगा का छोटा कुँवर व सिंहासन का उत्तराधिकारी था ।। बनवीर उसका संरक्षक था ।। बनवीर सिंहासन प्राप्त करने के लिए उसकी हत्या कराना चाहता था ।।

5- पन्ना धाय खुद भी ‘दीपदान’ उत्सव में क्यों नहीं गई?
उत्तर— बनवीर की कुटिल प्रकृति से पन्ना भलीभाँति परिचित थी ।। उसे यह आभास हो गया था कि बनवीर कुँवर उदयसिंह को अपने मार्ग से हटाना चाहता है, अत: वह कुँवर उदयसिंह को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ‘दीपदान’ उत्सव में नहीं गई ।।

6- बनवीर द्वारा उदयसिंह के विरुद्ध रचे जाने वाले षड्यंत्र के बारे में पन्ना को कैसे आभास हुआ?
उत्तर– पन्ना को रावल की पुत्री सोना के व्यवहार और उसके कथनों तथा महल की सेविका सामली द्वारा दी गई सूचना के फलस्वरूप यह आभास हो गया था कि बनवीर उदयसिंह के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहा है ।। सामली से ही पन्ना को यह ज्ञात होता है कि अपने भाई विक्रमादित्य की मृत्यु करने के बाद बनवीर यह कह रहा था कि वह उदयसिंह को भी जीवित नहीं छोड़ेगा ।। उसने बनवीर के सैनिकों द्वारा उदयसिंह के महल को घेरे जाने की सूचना भी पन्ना को दी ।।

7- पन्ना शैया पर उदयसिंह की जगह पर चंदन को क्यों सुला देती है?
उत्तर— पन्ना उदयसिंह की बनवीर से रक्षा करने के लिए उदयसिंह को कीरतबारी की टोकरी में लिटाकर महल के बाहर भेज देती है तथा बनवीर को धोखा देने के लिए चंदन को उदयसिंह की शैया पर सुला देती है ।।

8- पन्ना बनवीर पर कटार से वार क्यों करती है?
उत्तर— पन्ना बनवीर को धोखा देने के लिए उदयसिंह की शैया पर चंदन को सुला देती है, जब बनवीर सोए हुए चंदन को उदयसिंह समझकर उसकी हत्या करना चाहता है, तब पन्ना उसे ललकारते हुए उस पर कटार से वार करती है ।।

9- उदयसिंह को बचाने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा रहे थे?
उत्तर— उदयसिंह को बचाने के लिए पन्ना बहुत से उपाय करती है ।। वह उदयसिंह को सोना के बुलाने पर भी दीपदान उत्सव में नहीं भेजती और सोना को वापस भेज देती है ।। सामली द्वारा उदयसिंह की हत्या के षड्यंत्र की सूचना मिलने के बाद वह उदयसिंह को कीरतबारी की टोकरी में लिटाकर महल से बाहर सुरक्षित स्थान पर भेज देती है तथा उसके स्थान पर अपने पुत्र चंदन को उसकी शैया पर सुला देती है ।।

10- इस एकांकी में कीरत का क्या योगदान है?
उत्तर— ‘दीपदान’ एकांकी में जूठी पत्तल उठाने वाले कीरतबारी का महत्वपूर्ण योगदान है, वही पन्ना के कहे अनुसार अपनी टोकरी में उदयसिंह को लिटाकर व पत्तलों से छिपाकर महल के बाहर सुरक्षित स्थान पर ले जाता है, जिससे उदयसिंह के प्राणों की रक्षा होती है ।।

11- स्पष्ट कीजिए कि इस एकांकी का शीर्षक ‘ दीपदान’ सर्वथा उपयुक्त एवं सार्थक है ।।
उत्तर— इस एकांकी का शीर्षक दीपदान सर्वथा उपयुक्त एवं सार्थक है, क्योंकि एकांकी में सभी नगर निवासी तुलजा भवानी के सामने मयूर पक्ष कुंड में दीप का दान करते हैं तथा धाय माँ पन्ना अपनी स्वामिभक्ति के कारण उदयसिंह को बचाने के लिए अपने कुल के दीपक चंदन का दान करती है तथा बनवीर उदयसिंह के धोखे में चंदन की हत्या कर यमराज के सामने दीपदान करता है ।। अत: यह शीर्षक सर्वथा उपयुक्त एवं सार्थक है ।।

(ख) विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1- ‘दीपदान’ एकांकी का कथासार अपने शब्दों में लिखिए ।।

उत्तर— ‘दीपदान’ डा-रामकुमार वर्मा का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक एकांकी है ।। वे हिंदी एकांकी के जनक थे तथा हिंदी साहित्य में ‘एकांकी सम्राट’ के रूप में जाने जाते थे ।। दीपदान एकांकी की कथासार संक्षेप में निम्नवत् है

दीपदान एकांकी की कथा चित्तौड़ की एक घटना पर आधारित है, जिसमें राजपूताना के त्याग-बलिदान का इतिहास चित्रित हुआ है ।। चित्तौड़गढ़ के महाराणा संग्राम सिंह की मृत्यु के बाद चित्तौड़गढ़ के वास्तविक उत्तराधिकारी का प्रश्न उठता है, जो वास्तव में राणा साँगा के छोटे पुत्र कुँवर उदयसिंह थे ।। परंतु कुँवर उदयसिंह के अल्पव्यस्क होने के कारण राणा साँगा के छोटे भाई पृथ्वीसिंह के दासीपुत्र बनवीर को उदयसिंह के संरक्षक के रूप में चित्तौड़ की गद्दी सौंप दी जाती है ।। बनवीर बड़ा महत्वाकांक्षी व दुष्ट था ।। वह चित्तौड़ पर निरंकुश राज्य करना चाहता था ।। अत: वह ‘मयूर-पक्ष’ कुंड में असमय ही ‘दीपदान’ उत्सव का आयोजन कर उदयसिंह की हत्या का षड्यंत्र रचता है ।।

कुँवर उदयसिंह की संरक्षिका पन्ना धाय, बनवीर की कुटिल प्रवृत्ति से भलीभाँति परिचित थी ।। अत: वह षड्यंत्र को भाँपकर उदयसिंह को उत्सव में नहीं जाने देती ।। कुँवर उदयसिंह पन्ना से दीपदान उत्सव में जाने की जिद करते हैं और अंतत: रूठकर बिना कुछ खाए भूमि पर सो जाते हैं ।। तभी रावल सरूपसिंह की पुत्री सोना उदयसिंह को उत्सव में ले जाने के लिए आती है, किंतु पन्ना उसको फटकारकर भगा देती है ।। वह सोना से स्पष्ट कहती है कि “चित्तौड़ रास-रंग की भूमि नहीं है, जौहर की भूमि है ।। यहाँ आग की लपटें नाचती हैं, सोना जैसी रावल की लड़कियाँ नहीं ।।” ।। इसके बाद पन्ना का पुत्र चंदन आता है और कुँवर के विषय में पूछता है और पन्ना से अपनी माला ठीक करने के लिए कहता है ।। तभी बाहर से घबराई हुई सेविका सामली आती है तथा पन्ना को महाराणा विक्रमादित्य की हत्या की सूचना देती है ।। वह पन्ना को बताती है कि बनवीर को लोगों ने कहते सुना है कि वह कुँवर उदयसिंह को भी जीवित नहीं छोड़ेगा ।।

पन्ना कुँवर उदयसिंह की रक्षा का उपाय सोचते हुए उन्हें लेकर कुंभलगढ़ भाग जाने को कहती है ।। तब सामली उसे महल को सैनिकों के द्वारा घेरे जाने के बारे में बताती है ।। तब जूठी पत्तल उठाने वाला कीरतबारी आता है तथा पन्ना उदयसिंह को महल से बाहर भेज देने की योजना तैयार करती है. और उदयसिंह को कीरत की टोकरी में लिटाकर पत्तलों से छिपाकर महल के बाहर भेज देती है तथा उदयसिंह के स्थान पर अपने पुत्र चन्दन को उसकी शैया पर सुला देती है ।। कुछ देर बाद बनवीर हाथ में नंगी तलवार लिए उदयसिंह के कमरे में आता है जिस पर रक्त लगा होता है ।। वह पन्ना को जागीर का प्रलोभन देता है, पर पन्ना अपने कर्तव्य पर दृढ़ रहती है और बनवीर को फटकारती हुई कहती है- “राजपूतनी व्यापार नहीं करती महाराज! वह या तो रणभूमि पर चढ़ती है या चिता पर ।।” तब क्रोधित बनवीर उदयसिंह के धोखे में चंदन को पन्ना की आँखों के सामने ही मौत के घाट उतार देता है ।। पन्ना चीखकर मूर्च्छित हो जाती है ।। बनवीर के इस क्रूर कांड और पन्ना के अपूर्व त्याग-बलिदान के साथ ही एकांकी का कथानक समाप्त हो जाता है ।।

2- डॉ-रामकुमार वर्मा का जीवन परिचय देते हुए उनकी कृतियों की विवेचना कीजिए ।।

उत्तर— रामकुमार वर्मा आधुनिक हिंदी साहित्य में ‘एकांकी सम्राट’ के रूप में जाने जाते हैं ।। डॉ-रामकुमार वर्मा हिंदी भाषा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार और हास्य कवि के रूप में जाने जाते हैं ।। रामकुमार वर्मा की हास्य और व्यंग्य दोनों विधाओं में समान रूप से पकड़ है ।। नाटककार और कवि के साथ-साथ उन्होंने समीक्षक, अध्यापक तथा हिंदी साहित्य के इतिहास-लेखक के रूप में भी हिंदी साहित्य-सृजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।। रामकुमार वर्मा एकांकीकार, आलोचक और कवि हैं ।। इनके काव्य में ‘रहस्यवाद’ और ‘छायावाद’ की झलक है ।।

जीवन परिचय- डॉ-रामकुमार वर्मा का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जिले में 15 सितंबर सन् 1905 ई-में हुआ ।। इनके पिता लक्ष्मीप्रसाद वर्मा डिप्टी कलक्टर थे ।। वर्मा जी को प्रारंभिक शिक्षा इनकी माता श्रीमती राजरानी देवी ने अपने घर पर ही दी, जो उस समय की हिंदी कवयित्रियों में विशेष स्थान रखती थी ।। बचपन में इन्हें ‘कुमार’ के नाम से पुकारा जाता था ।। रामकुमार वर्मा में प्रारंभ से ही प्रतिभा के स्पष्ट चिह्न दिखाई देते थे ।। ये सदैव अपनी कक्षा में प्रथम आया करते थे ।। पठनपाठन की प्रतिभा के साथ ही साथ रामकुमार वर्मा शाला के अन्य कार्यों में भी काफी सहयोग देते थे ।। अभिनेता बनने की रामकुमार वर्मा की बड़ी प्रबल इच्छा थी ।। अतएव इन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में कई नाटकों में एक सफल अभिनेता का कार्य किया है ।। रामकुमार वर्मा सन् 1922 ई-में दसवीं कक्षा में पहुँचे ।। इसी समय प्रबल वेग से असहयोग की आँधी उठी और रामकुमार वर्मा राष्ट्र सेवा में हाथ बॅटाने लगे तथा एक राष्ट्रीय कार्यकर्ता के रूप में जनता के सम्मुख आए ।। इसके बाद वर्मा जी ने पुनः अध्ययन प्रारंभ किया और सब परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करते हुए प्रयाग विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में एम- ए- में सर्वप्रथम आए ।। रामकुमार वर्मा ने नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से ‘हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास’ पर पी-एच-डी- की उपाधि प्राप्त की ।। अनेक वर्षों तक रामकुमार वर्मा प्रयाग विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक तथा फिर अध्यक्ष रहे ।।

हिंदी एकांकी के जनक रामकुमार वर्मा ने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और साहित्यिक विषयों पर 150 से अधिक एकांकी लिखीं ।। भगवतीचरण वर्मा ने कहा था, “डॉ- रामकुमार वर्मा रहस्यवाद के पंडित हैं ।। उन्होंने रहस्यवाद के हर पहलू का अध्ययन किया है ।। उस पर मनन किया है ।। उसको समझना हो और उसका वास्तविक और वैज्ञानिक रूप देखना हो तो उसके लिए श्री वर्मा का ‘चित्ररेखा’ सर्वश्रेष्ठ काव्य ग्रंथ होगा ।।” रामकुमार वर्मा हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक थे ।। उन्होंने कहा भी है, “जिस देश के पास हिंदी जैसी मधुर भाषा है, वह देश अंग्रेजी के पीछे दीवाना क्यों है? स्वतंत्र देश के नागरिकों को अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए, हमारी भावभूमि भारतीय होनी चाहिए ।। हमें जूठन की ओर नहीं ताकना चाहिए ।।” रुचि- डॉ-रामकुमार वर्मा की कविता, संगीत और कलाओं में गहरी रुचि थी ।। 1921 तक आते-आते युवक रामकुमार, गाँधी जी के असहयोग आंदोलन में सम्मिलित हो गए ।। उन्होंने 17 वर्ष की आयु में एक कविता प्रतियोगिता में 51 रुपये का पुरस्कार जीता था ।। यहीं से उनकी साहित्यिक यात्रा आरंभ हुई थी ।।

डॉ-रामकुमार वर्मा ने देश ही नहीं विदेशों में भी हिंदी का परचम लहराया ।। 1957 में वे मास्को विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में सोवियत संघ की यात्रा पर गए ।। 1963 में उन्हें नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने शिक्षा सहायक के रूप में आमंत्रित किया ।। 1967 में वे श्रीलंका में भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष के रूप में भेजे गए ।। 5 अक्टूबर, सन् 1990 ई-में इस महान एकांकीकार का प्रयाग में निधन हो गया ।। कृतियाँकाव्य कृतियाँ- अंजलि, चित्तौड़ की चिता, चित्ररेखा, एकलव्य, जौहर, चंद्रकिरण, उत्तरायण, रूपराशि आदि ।। एकांकी- बादल की मृत्यु (सर्वप्रथम एकांकी), रेशमी टाई, दीपदान, इंद्रधनुष, बापू, रूपरंग, रिमझिम, चंपक, दस मिनट, मयूर पंख, पृथ्वीराज की आँखें आदि एकांकी इन्हें प्रसिद्धि दिलाने में विशेष सहायक रहे ।।

3- रामकुमार जी को किन-किन उपाधियों से अलंकृत किया गया?
उत्तर— डॉ-रामकुमार वर्मा हिंदी की लघु नाट्य परंपरा को एक नया मोड़ देने वाले ‘एकांकी सम्राट’ के रूप में जाने जाते हैं ।। रामकुमार वर्मा को नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से ‘हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास’ पर शोध करने के फलस्वरूप पी-एच-डी- की उपाधि प्रदान की गई ।। ‘प्रयाग विश्वविद्यालय’ ने इन्हें एक प्रतिभाशाली छात्र के रूप में सम्मानित करते हुए ‘हालैंड मेडिल’ से सम्मानित किया ।। भारत सरकार ने इनको सन् 1963 ई-में ‘पद्म-भूषण’ उपाधि से विभूषित किया ।। इनको मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘कालिदास’ तथा ‘देव’ पुरस्कार दिए गए और ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग’ द्वारा इन्हें ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि से अलंकृत किया गया ।।

4— ‘राजपूतनी व्यापार नहीं करती महाराज! वह या तो रणभूमि पर चढ़ती है या चिता पर’इस कथन के माध्यम से पन्ना के किस चारित्रिक गुण का पता चलता है? स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर— ‘राजपूतनी व्यापार नहीं करती महाराज! वह या तो रणभूमि पर चढ़ती है या चिता पर’ इस कथन के माध्यम से पन्ना के सच्ची क्षत्राणी होने के गुण का पता चलता है ।। उसमें क्षत्राणियों जैसा अदम्य साहस, असीम त्याग और वीरता है ।। वह बनवीर की क्रूरता के सामने नतमस्तक नहीं होती और उसे धिक्कारते हुए कहती है- “धिक्कार है बनवीर! तुम्हारी माँ ने तुम्हें जन्म देते ही क्यों न मार डाला ।।’ वह साहस के साथ बनवीर पर अपनी कटार से प्रहार करती है और उसे हत्यारा बनवीर कहकर संबोधित करती है ।। वह रावल की पुत्री सोना को भी फटकारती है व कहती है-
“ चित्तौड़ रास-रंग की भूमि नहीं है, जौहर की भूमि है ।। यहाँ आग की लपटें नाचती हैं सोना जैसी रावल की लड़कियाँ नहीं ।।”
वह उदयसिंह से भी कहती है-
“चित्तौड़ में तलवार से कोई नहीं डरता, कुँवर! जैसे लता में फूल खिलते हैं, वैसे ही यहाँ के वीरों के हाथों में तलवार खिलती है ।।”
उसमें क्षत्राणियों के समान त्याग का गुण विद्यमान है ।। वह सोते हुए चंदन को संबोधित करते हुए कहती है-
“आज मैंने भी दीपदान किया है ।। दीपदान! अपने जीवन का दीप मैंने रक्त की धारा पर तैरा दिया है ।।”
अतः पन्ना निर्भीक, त्यागी, स्वामिभक्त व सच्ची क्षत्राणी है ।।

5- ‘दीपदान’ एकांकी के आधार पर सोना का चरित्र-चित्रण कीजिए ।।
उत्तर— सोना दीपदान एकांकी की दूसरी प्रमुख पात्र है ।। उसकी प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नवत् हैं
(अ) अत्यंत सुंदर- सोना रावल सरूपसिंह की अत्यंत रूपवती लड़की है ।। उसकी आयु 16 वर्ष है ।। वह कुँवर उदयसिंह के साथ खेलती है तथा आयु में उससे दो वर्ष बड़ी है ।।
(ब) वाक्पटु एवं शिष्टाचारी- सोना बोलने में निपुण व राजमहल के शिष्टाचार से परिचित है ।। उसके शिष्टाचार व वाक्पटुता का उस समय पता चलता है जब वह महल में कुंवर उदय सिंह को दीपदान उत्सव के लिए लेने आती है ।। महल में प्रवेश कर वह पन्ना धाय को प्रणाम करती है और उनसे उदयसिंह के विषय में पूछती है ।। पन्ना के कहने पर-,“ वे थक गए हैं ।। सोना चाहते हैं ।।’ तब वह प्रत्युत्तर देती है, “सोना चाहते हैं! तो मैं भी तो सोना हूँ ।।”
(स) सरल स्वभाव- सोना स्वभाव से सरल है ।। वह राजमहल में होने वाले षड्यंत्रों से अनभिज्ञ है ।। पन्ना के सम्मुख नृत्य की बात करना, बनवीर द्वारा कही गई बातों को खेल-खेल में पन्ना को बता देना, मयूरपक्ष कुंड उत्सव की बातों का वर्णन करना उसके सरल स्वभाल के ही प्रमाण हैं ।।
(द) अस्थिर- सोना स्वयं को स्थिर नहीं रख पाती ।। वह भ्रमित-सी दिखाई पड़ती है, क्योंकि वह एक ओर कुँवर उदयसिंह से प्रेम करती है और दूसरी ओर बनवीर के प्रलोभन में आ जाती है ।।
इस प्रकार निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि सोना में अल्हड़ कन्या की समस्त विशेषताएँ हैं ।।

6- ‘सामली’ के विषय में संक्षिप्त रूप में लिखिए और इस एकांकी में उसके योगदान के बारे में बताइए ।।
उत्तर— ‘सामली’ अंत:पुर की साधारण-सी परिचारिका (सेविका) है ।। जिसकी आयु 28 वर्ष है ।। वह कुँवर उदयसिंह के प्रति स्वामिभक्त है ।। वह कुँवर उदयसिंह से प्रेम करती है व उन्हें चित्तौड़ के महाराज के रूप में देखती है ।। सामली का ‘दीपदान’ एकांकी में महत्वपूर्ण स्थान है ।। सामली ही पन्ना धाय को बनवीर के षड्यंत्र व महाराणा विक्रमादित्य की हत्या की सूचना देती है ।। वहीं पन्ना को बताती है कि “लोगों ने बनवीर को कहते सुना है कि वह कुँवर उदयसिंह को भी सिंहासन का अधिकारी समझकर जीवित नहीं रहने देगा ।।” वह पन्ना से कहती है कि सभी सैनिक व सामंत भी उसी के साथ हैं ।। सामली पन्ना धाय की कुँवर उदयसिंह को महल से बाहर भेजने में मदद करती है ।। कीरतबारी के आने पर वह पन्ना के आदेशानुसार महल के बाहर सैनिकों की संख्या ज्ञात करती है तथा कीरत को उत्तर दिशा की तरफ से निकलने के लिए कहती है क्योंकि उस दिशा में सैनिकों की संख्या केवल सात है ।। उसके योगदान से ही कँवर उदयसिंह के प्राण बचाने में पन्ना सफल होती है ।। सामली पन्ना को बनवीर के आने पर कुँवर को न पाकर बनवीर के प्रश्न पूछने की स्थिति से अवगत कराती है ।। पन्ना द्वारा कुँवर उदयसिंह की शैया पर चंदन को सुला देने की बात पर वह दुःखी होते हुए वहाँ से चली जाती है ।। इस प्रकार निष्कर्ष रूप में सामली का पन्ना की सहायिका के रूप में योगदान अतुलनीय है ।। सामली के योगदान से ही पन्ना चित्तौड़ के उत्तराधिकारी का संरक्षण करने में सफल रहती है ।।

7- ‘महल में धाय माँ अरावली पहाड़ बनकर बैठ गई है’ से लेखन के कहने का क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर— महल में धाय माँ अरावली पहाड बन कर बैठ गई है’ से लेखक का अभिप्राय यह है कि धाय माँ पन्ना कँवर उदयसिंह की रक्षा में निश्चल है ।। उन पर स्वामिभक्ति के कारण किसी प्रलोभन व सुख-दुःख का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।। वह कंवर उदयसिंह की सेवा व रक्षा में दिन-रात लीन है, जिसके कारण वह अपने पुत्र चंदन का भी बलिदान कर देती है ।। पन्ना के महल में उदयसिंह की संरक्षिका के रूप में होने के कारण ही बनवीर उदयसिंह को मारने में असफल रहता है ।। वह अरावली पर्वत की भाँति ही उदयसिंह को आने वाले तूफानों से बचाती है ।।

(ग) वस्तुनिष्ठ प्रश्न


1- ‘दीपदान’ उत्सव के आयोजन का उद्देश्य था
(अ) तुलजा भवानी को प्रसन्न करना (ब) उदयसिंह की हत्या
(स) बनवीर संगीत-प्रेमी व विलासी प्रवृत्ति का था (द) इनमें से कोई नहीं

2- इस एकांकी का शीर्षक दीपदान’ किस कारण से अधिक उपयुक्त है?
(अ) बनवीर उदयसिंह को मारकर दीपदान करता है ।। (ब) पन्ना अपने कर्तव्य के लिए कुल-दीपक का दान करती है ।।
(स) चित्तौड़ की स्त्रियाँ नृत्य और गान के साथ दीपदान करती हैं ।। (द) उपर्युक्त सभी

3- उदयसिंह को नृत्य दिखाने के लिए ले जाने का सोना इतना आग्रह क्यों करती है?
(अ) वह उदयसिंह को नृत्य दिखाना चाहती है ।। (ब) वह मन ही मन उदयसिंह से प्रेम करती है ।।
(स) वह उदयसिंह को बनवीर के हाथों में सौंपना चाहती है ।। (द) उपर्युक्त सभी

4- बनवीर किस वजह से उदयसिंह को मारना चाहता था?
(अ) क्योंकि वह पन्ना से बैर रखता था ।। (ब) क्योंकि उदयसिंह सोना के बुलाने पर नहीं गया ।।
(स) क्योंकि वह उदयसिंह को मारकर चित्तौड़ का राणा होना चाहता था ।। (द) उपर्युक्त सभी

5- पन्ना चंदन को उदयसिंह की शय्या पर सुला देती है क्योंकि
(अ) उसे आशा नहीं है कि बनवीर चंदन की हत्या करेगा ।। (ब) चंदन उस पर सोना चाहता है ।।
(स) पन्ना चंदन को उदयसिंह बनाकर बनवीर को धोखा देना चाहती है ।। (द) उपर्युक्त सभी

6- बनवीरने चंदन से पहले किसकी हत्या की थी?
(अ) सामली (ब) कीरतबारी (स) विक्रमादित्य (द) सोना

7- ‘एक तिनके ने राज सिंहासन को सहारा दिया है’ कथन है
(अ) बनवीर का (ब) कीरतबारी का (स) सामली का (द) पन्ना का

8- जब कीरतबारी अपनी टोकरी में उदयसिंह को ले जा रहा था, तो पन्ना उसे कहाँ मिलने को कहती है?
(अ) कुंभलगढ़ के दुर्ग के मार्ग पर (ब) बेरिस नदी के किनारे श्मशान के पास
(स) बनास नदी के तट पर स्थित शिवालय में (द) कहीं भी नहीं

9- कीरत उदयसिंह को टोकरी में छिपाकर किले के बाहर ले जाता है क्योंकि
(अ) उसे इसके बदले में बड़ा पुरस्कार मिलने की आस है ।। (ब) वह उदयसिंह से स्नेह करता है ।।
(स) वह राज्यभक्ति की भावना से प्रेरित होकर कुँवर की रक्षा करना चाहता है ।।
(द) वह पन्ना के आदेश को अपना धर्म समझता है ।।

10- ‘दीपदान’ एकांकी के लिए इसके अतिरिक्त सबसे उपयुक्त अन्य शीर्षक कौन-सा है?
(अ) हत्यारा बनवीर (ब) त्याग (स) स्वामिभक्ति (द) पुत्र का बलिदान

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