UP Board Solutions for Class 11 English Prose Chapter 2 Forgetting free pdf

UP Board Solutions for Class 11 English Prose Chapter 2 Forgetting free pdf पाठ का हिंदी अनुवाद

UP Board Solutions for Class 11 English Prose Chapter 2 Forgetting free pdf
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सम्पूर्ण पाठ का हिन्दी रूपान्तरण रेलयात्रियों द्वारा खोए हुए और अब बिक्री के लिए लन्दन के एक बड़े स्टेशन पर रखे हुए सामान की सूची प्रकाशित हुई है और बहुत-से आदमी जिन्होंने वह सूची पढ़ी है, अपने साथियों की विस्मृति पर आश्चर्यचकित हैं। यदि इस विषय पर सांख्यिकीय आँकड़ों का लेखा-जोखा उपलब्ध हो, फिर भी मुझे सन्देह है कि यह देखने में आएगा कि विस्मृति सामान्य है। यह मानव की याददाश्त की कार्यकुशलता है न कि अकुशलता जो मुझे आश्चर्य में डाल देती है। आधुनिक मनुष्य टेलीफोन के नम्बरों को याद रखता है। उसे अपने मित्रों के पते भी याद रहते हैं। उसे उच्च गुणवत्ता वाली शराब उत्पन्न करने की तिथि याद रहती है। उसे दोपहर व रात्रि के भोजन की निमन्त्रण तिथियाँ याद रहती हैं। उसकी स्मृति में अभिनेताओं, अभिनेत्रियों, क्रिकेट के खिलाड़ियों, फुटबाल के खिलाड़ियों तथा हत्यारों के नाम भरे रहते हैं। वह आपको बता सकता है कि कई वर्ष पूर्व अगस्त के महीने में कैसा मौसम था और उस देहाती होटल का नाम भी,जहाँ उसने ग्रीष्म ऋतु में बहुत बुरा भोजन किया था। उसके साधारण जीवन में, पुनः उसे लगभग सभी चीजें याद रहती हैं, जिनको याद रखने की उससे उम्मीद की जाती है। लन्दन में ऐसे कितने व्यक्ति हैं जो प्रातः वस्त्र पहनते हुए किसी वस्त्र को पहनना भूल जाते हो? सौ में से एक भी नहीं। कदाचित् दस हजार में एक भी नहीं। ऐसे कितने लोग हैं जो घर के बाहर जाते समय सामने का द्वार बन्द करना भूल जाते हों? शायद कोई भी नहीं। और ऐसा पूरे दिन होता रहा है, सोने का समय आने तक लगभग प्रत्येक व्यक्ति ठीक समय पर ठीक वस्तु याद रखता है तथा एक साधारण व्यक्ति भी सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने से पहले बत्ती बुझाना कभी नहीं भूलता।


यह मानना चाहिए कि कुछ ऐसे विषय हैं जिनके सम्बन्ध में याददाश्त अपनी सामान्य पूर्णता से कम कार्य करती है। मैं सोचता हूँ कि यह केवल बहुत ही व्यवस्थित ढंग से काम करने वाला व्यक्ति ही हो सकता है जो अपने चिकित्सक द्वारा बताई गई दवा को लेना सदैव याद रख सकता है। यह और अधिक आश्चर्यजनक है क्योंकि दवाई उन मामूली वस्तुओं में से एक है जो याद रखनी चाहिए। नियमानुसार यह सोचा जाता है कि दवाई भोजन से पहले, भोजन करते समय या भोजन के पश्चात् ली जाती है, ओर भोजन स्वयं दवाई की याद दिलाने वाला होना चाहिए। फिर भी यह एक तथ्य है कि नैतिक विभूतियों के अतिरिक्त बहुत ही कम लोग नियमित रूप से दवाई लेना याद रखते हैं। कुछ मनोवैज्ञानिक हमें बताते हैं कि हम वस्तुओं को इसलिए भूल जाते हैं क्योंकि हम उनको भूलने की इच्छा रखते हैं और यह भी हो सकता है कि बहुत से लोगों को गोलियों और काढ़ा (पीने वाली तरल दवाइयाँ) लेने से घृणा होने के कारण वे निर्धारित घण्टे पर उनको लेना भूल जाते हों। फिर भी इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि मुझ जैसा दवाईओं का जीवनपर्यन्त भक्त उनको लेने में किस प्रकार भुलक्कड़ हो सकता है, जैसा कि वे लोग जो सबसे अधिक अनिच्छा से उनको लेते हैं। एक नई और बहुत विज्ञापित दवाई के आते ही मुझे बहुत प्रसन्नता होती है। फिर भी चाहे दवाई मेरी जेब में रखी हो, दवाई लेने का समय पास आते ही मैं भूल जाता हूँ। दवाई बेचने वाले उन दवाईयों से बहुत धन कमाते हैं, जिन्हें खाना लोग भूल जाते हैं।


मैं समझता हूँ कि विस्मृति (भुलक्कड़) का सर्वसामान्य रूप पत्रों को डाक में डालने के मामलों में होता है। यह इतना सामान्य है कि मैं एक महत्वपूर्ण पत्र को मुझसे मिलकर जाते व्यक्ति को डाक में डालने के लिए देने पर विश्वास करने में अनिच्छुक हूँ। उसकी स्मृति पर मुझे इतना कम विश्वास होता है कि पत्र देने से पहले मैं उसे शपथ दिला देता हूँ। जहाँ तक मेरा अपना सम्बन्ध है, कोई भी व्यक्ति जो मुझे डाक में डालने के लिए पत्र देगा वह चरित्र को बहुत कम परखने वाला होगा। चाहे मैं पत्र हाथ में ही लिए होऊँ फिर भी मैं सदैव पहले लैटर बॉक्स (पत्र-पेटिका) से आगे निकल जाता हूँ, तभी मुझे याद आता है कि मुझे पत्र डाल देना चाहिए था। पत्र को हाथ में लिए-लिए थककर सुरक्षा की दृष्टि से उसे मैं अपनी जेब में रख लेता हूँ और उसके बारे में बिल्कुल भूल जाता हूँ। इसके बाद नियंत्रित और शांत जिंदगी चलती है जब तक कि ऐसी परिस्थितियाँ नहीं बन जाती कि मुझसे उलझन भरे शर्मनाक प्रश्न नहीं किए जाते हैं और मैं अपनी गलती के साक्ष्यों को प्रस्तुत करते हुए पत्रों को जेब के बाहर नहीं निकालता हूँ। यह माना जा सकता है, कि ऐसा दूसरे लोगों के पत्रों में मेरी रुचि कम होने के कारण होता होगा, किन्तु यह स्पष्टीकरण नहीं हो सकता क्योंकि मैं उन थोड़े से पत्रों को भी डालना भूल जाता हूँ जिनको मैं स्वयं लिखना याद रखता हूँ।


जहाँ तक रेलगाड़ियों और टैक्सियों में सामान छोड़ने की बात है, ऐसे मामलों में मैं बड़ा अपराधी नहीं हूँ। छड़ियों और पुस्तकों के अतिरिक्त मैं लगभग किसी भी वस्तु को याद रख सकता हूँ और प्रायः पुस्तकों को भी मैं याद रख सकता हूँ। मुझे छड़ियों को रख पाना पूरी तरह असम्भव लगता है। उनके प्रति मेरी रुचि पुराने फैशन की है और मैं उनको प्रायः खरीदता रहता हूँ परन्तु मैं ज्यों ही किसी मित्र के घर जाता हूँ अथवा रेलगाड़ी में यात्रा पर जाता हूँ, तब एक अन्य (दूसरी) छड़ी खोई हुई वस्तुओं की दुनिया में चली जाती है। खो जाने के डर से, मैं छाता ले जाने का साहस नहीं करता। मजबूती से जकड़कर पकड़े रखने वाले किसी छाता वाहक ने क्या कभी छाता न खोने का ऐसा यश पाया?


फिर भी हममें से कुछ लोग अपनी विस्मृति (भुलक्कड़पन) के कारण अपनी बहुत-सी सम्पत्ति को यात्रा के दौरान खो देते हैं। जबकि एक औसत इंसान अपने पहुँचने के स्थान पर अर्थात् गंतव्य स्थान पर अपने सामान सहित सुरक्षित पहुँच जाता है। वर्ष में रेलगाड़ियों में खोई हुई वस्तुओं की सूची बताती है कि वयस्क व्यक्तियों की अपेक्षा युवा व्यक्ति अपनी वस्तुएँ अधिक खोते हैं और सामान्यतया गम्भीर रहने वाले व्यक्तियों की अपेक्षा खिलाड़ियों की स्मृति (याददाश्त) बहुत खराब होती है। उदाहरण के लिए काफी अधिक संख्या में फुटबॉल की गेंदे और क्रिकेट के बल्ले इन खिलाड़ियों द्वारा खो दिए जाते हैं। यह कार्य उन लड़कों के लिए सरल होता है जो खेल से लौटते हुए अपने सामान को भूल जाते हैं क्योंकि उनकी कल्पनाएँ खेल के मैदान के विचारों से भरी रहती हैं और उनके मस्तिष्क ऊँची कल्पनाओं से भरे होते हैं। कुछ खिलाड़ियों के मस्तिष्क अपनी हार के कारण और भ्रम के कारण भरे हुए रहते हैं। वे अपनी उपलब्धियों को अपनी भूलों का परिणाम बताते हैं। वे स्वयं को बाहरी संसार से अलग देखते हैं। जब खिलाड़ी रेलगाड़ियों से उतरते हैं तब उनकी स्मृति (याददाश्त) उन गेंद और बल्ले लेने जैसे कार्यों को याद रखने से रोक देती है। शेष बचे हुए दिन में वे काल्पनिक संसार में विचरण करते हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि ऐसा ही उनको (मछली पकड़ने वाले) काँटेबाज के बारे में कहा जा सकता है जो मछली पकड़ने का अपना काँटा भूल जाते हैं। सामान्य रूप से काँटेबाजों के बारे में कहा जाता है कि वे सबसे अधिक कल्पनाओं में खोए रहते हैं और एक मछली पकड़ने वाला जो मछली पकड़ने के बाद अपने कार्य में विस्मृति (भुलक्कड़पन) को बताने के लिए विवश होता है, उसके द्वारा वास्तव में मछली पकड़ने के काँटे को भुला दिया जाता है क्योंकि वह कल्पना-संसार के सपनों में खोया रहता है। उसकी विस्मृति (भुलक्कड़पन) उसके एक दिन के कार्य के बारे में एक बहुत बड़े आनन्द के लिए सम्मान की बात होती है। वह मछली पकड़ने के अपने काँटे को भूल जाता है, जैसे कि कवि एक पत्र को डालना भूल जाता है क्योंकि उसका मस्तिष्क अधिक वैभवशाली सामग्री से भरा होता है। मुझे इस प्रकार की विस्मृति (भुलक्कड़पन) एक प्रकार का सद्गुण प्रतीत होती है। विस्मृत (भुलक्कड़) व्यक्ति एक ऐसा व्यक्ति होता है जो अपने जीवन को सर्वश्रेष्ठ ढंग से संवार रहा होता है इसलिए उसके पास औसत दर्जे के कार्यों को याद रखने के लिए समय नहीं होता है। पत्र को पत्र-पेटिका में डालने के लिए कौन सुकरात या कॉलरिज पर यकीन कर सकता था? उनकी आत्मा इन वस्तुओं से ऊपर थीं (अर्थात् वे अपने दार्शनिक उच्च विचारों में डूबे रहते थे)।

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इस प्रश्न पर कि क्या अच्छी याददाश्त का होना आवश्यक है, प्रायः वाद-विवाद छिड़ता रहा है और भूल करने वाले व्यक्ति कभी-कभी अपनी श्रेष्ठता मनवाने का प्रयास करते रहे हैं। वे कहते हैं कि एक व्यक्ति, जो पूर्णरूप से स्मरण करने वाला यन्त्र है, प्रथम श्रेणी की बुद्धि वाला व्यक्ति कभी नहीं होता। वे बच्चों या बड़ों के विविध दृष्टान्तों का उल्लेख करते हैं, जिनकी आश्चर्यजनक स्मृतियाँ थीं और कहने को उनमें कोई बुद्धि नहीं थी। फिर भी मैं सोचता हूँ कि कुछ मिलाकर, महान् लेखक व महान् संगीतकार विलक्षण स्मरण शक्ति वाले हुए हैं। जिन कवियों को मैं जानता हूँ उनकी याददाश्त उन शेयर दलालों से कहीं अच्छी थी जिनसे मैं परिचित रहा हूँ। वास्तव में स्मृति उनकी कला की आधी ही धरोहर है। इसके विपरीत ऐसा लगता है कि राजनेताओं में भुलक्कड़पन का तत्व अधिक होता है। दो राजनेताओं को एक ही घटना का स्मरण करने दो- उदाहरणार्थ किसी मन्त्रिपरिषद् की बैठक में क्या हुआ था- और उनमें से प्रत्येक आपको कहेगा कि दूसरे राजनेता की कहानी अत्यधिक गलत है या तो उसकी स्मृति छलनी जैसी है या वह सच को झूठ में बदलने वाला दुस्साहसी है। राजनेताओं की आत्मकथाओं तथा भाषणों में तथ्यों को बार-बार चुनौती दी जाती है, यह इस पहलू को दर्शाती है कि संसार ने अभी तक आदर्श राजनेताओं को उत्पन्न करना आरम्भ नहीं किया है, ऐसे व्यक्ति जिनमें महान् कवियों के समान याददाश्त व बुद्धि कौशल दोनों ही तत्व मिलते हों।


साथ-ही-साथ सामान्य रूप से अच्छी याददाश्त इतनी औसत होती है कि हम एक व्यक्ति को जो इसे नहीं रखता, उसे सनकी या झक्की कहते हैं। मैंने एक ऐसे पिता के बारे में सुना है जो बच्चों को घुमाने वाली चार पहियों वाली गाड़ी में अपने बच्चे को घुमाने ले गया था और अपने भ्रमण के दौरान उजली धूप के प्रलोभन में रूक गया और शराब पीने के लिए मधुशाला में प्रवेश कर गया। बच्चे को गाड़ी में बाहर छोड़कर वह शराब पीने के बाद वहाँ से पिछले दरवाजे से बाहर निकल गया। थोड़ी देर बाद उसकी पत्नी को कुछ खरीददारी करनी थी, वह उस शराबखाने के सामने से गुजरी जहाँ अपने बच्चे को सोता हुआ देखकर भयभीत हो गई। अपने पति के व्यवहार पर नाराज होकर उसने उसे सबक सिखाने का निश्चय किया। अपने मन में कल्पना करते हुए कि जब वह बाहर आएगा और बच्चे को गायब देखेगा, वह बच्चा गाड़ी वहाँ से ले गई। वह घर पहुंची यह सोचते हुए कि उसका पति घबराया हुआ चेहरा और काँपते हुए होंठो के साथ शीघ्र ही यह सूचित करेगा कि बच्चे को चुरा लिया गया है। वह उसकी दशा का क्रोध के साथ आनन्द उठाएगी। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत निकली, जब दोपहर के खाने से तुरन्त पहले उसका पति प्रसन्नतापूर्वक मुस्कराता हुआ आया और पूछा, “मेरी प्रिय, आज खाने में क्या बनाया है?” बच्चे के विषय में वह भूल गया था कि वह उसे अपने साथ बाहर ले गया था। किसी दार्शनिक से नीचे स्तर के कितने लोगों में इस प्रकार का भुलक्कड़पन होगा। मुझे आशंका है कि इसमें से अधिकांश लोग ऐसी ही कमजोर स्मरण शक्ति लेकर जन्म लेते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो किसी भी आधुनिक बड़े शहर में परिवार व्यवस्था सुचारु रूप से चल ही नहीं सकती है।

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